राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने का जश्न मनाया। इस खास मौके पर दिल्ली में 26 से 28 अगस्त तक तीन दिन का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। गुरुवार को इस आयोजन का आखिरी दिन था, और इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। उनके बयान ने न सिर्फ लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि कई सवालों को भी हवा दी। आइए जानते हैं, उन्होंने क्या-क्या कहा।
इस्लाम और हिंदू सोच: एकता का पैगाममोहन भागवत ने अपने भाषण में इस्लाम और हिंदू दर्शन पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “जब से इस्लाम भारत में आया, तभी से ये हमारा हिस्सा है और आगे भी रहेगा। मैंने पहले भी ये बात कही थी। जो ये सोचता है कि इस्लाम यहां नहीं रहेगा, वो हिंदू सोच का नहीं हो सकता। हिंदू दर्शन हमें सिखाता है कि हम सब एक हैं।” भागवत ने जोर देकर कहा कि दोनों समुदायों में विश्वास और एकता की भावना ही आपसी संघर्ष को खत्म कर सकती है। उनका ये बयान हर उस शख्स के लिए है, जो भारत को एकजुट देखना चाहता है।
घुसपैठ और रोज़गार: देश की प्राथमिकताघुसपैठ के मुद्दे पर भी भागवत ने अपनी राय साफ की। उन्होंने कहा, “घुसपैठ को रोकना जरूरी है। सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है, धीरे-धीरे काम हो रहा है। लेकिन हमें ये भी देखना होगा कि हमारे देश के मुस्लिम नागरिकों को भी रोज़गार चाहिए। अगर रोज़गार देना है, तो अपने लोगों को प्राथमिकता दो। जो बाहर से आए हैं, उनके देश को उनकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।” भागवत का ये बयान देश में रोज़गार और नागरिकता के सवालों को नए सिरे से उठाता है।
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