जैन समाज के चल रहे दसलक्षण पर्व के दूसरे दिन, शुक्रवार को उत्तम मार्दव धर्म की पूजा का आयोजन धूमधाम से किया गया। इस दिन के विशेष आयोजन में संगीतमय धुनों के बीच महिला और पुरुष भक्तों ने मंडल के समक्ष अर्घ्य चढ़ाए और मार्दव धर्म की महिमा का गुणगान किया।
देवपुरा बघेरवाल छात्रावास के शांतिसिंधु सभा मंडपम में जैन मुनि वैराग्य सागर महाराज और मुनि सुप्रभ सागर महाराज के सानिध्य में संस्कार शिविर की विशेष क्रियाएँ पूर्ण की गईं। इन शिविरों का उद्देश्य समाज में धार्मिक और आध्यात्मिक जागरूकता फैलाना है, जिसमें आध्यात्मिक साधना और धर्म का पालन की प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।
वहीं, चौगान जैन मंदिर में आर्यिका सत्यमति माताजी और आर्यिका हेमश्री माताजी के सानिध्य में एक भव्य विधान हुआ, जिसमें भक्तों ने मिलकर धार्मिक मंत्रोच्चारण और पूजा अर्चना की। इस पूजा में बाल ब्रह्मचारिणी आस्था बहन ने पूजा की विधि का संचालन किया और समाज के सभी वर्गों को धार्मिक भावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया।
दसलक्षण पर्व का यह दिन खासतौर पर उत्तम मार्दव धर्म की पूजा के लिए समर्पित था, जो नम्रता, विनम्रता और शांति के प्रतीक होते हैं। इस दिन समाज के सदस्य धार्मिक क्रियाओं और आध्यात्मिक साधना के साथ अपने जीवन में मार्दव धर्म को अपनाने का संकल्प लेते हैं।
संस्कार शिविर और पूजा विधान के माध्यम से जैन समाज का यह पर्व एक नई ऊर्जा और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक बना, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और धर्म के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
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